जी हैं !

अपनी कल्पनाओं में तुझे रचकर, एक नई रचना करने का जी हैं।
तुझे अपनी कल्पनाओं से वास्तविकता में लेने का जी हैं।
तुझे जीवंत करके अपनी कलपना को अमर करने का जी हैं।
आज फिर तुझमे खुद को जीने का जी हैं।
इस अनंत संसार में अपनी कल्पनाओं  को लाकर,
एक पहचान बनाने का जी हैं।
अपनी कल्पनाओं में तुझे रचकर, एक नई रचना करने का जी हैं।

 

तेरी असीम शांति में खो जाने का जी हैं।
कल्पनाओं में मिलकर कही दूर जाने का जी हैं।
कुछ कहने, कुछ सुनने का, और
इस संसार से कही खो जाने का जी हैं।
तुझे खो कर भी अपनी कल्पनाओ में फिर पाने का जी हैं।
अपनी कल्पनाओं में तुझे रचकर, एक नई रचना करने का जी हैं।

 

 

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