खिलाड़ी

किसी ने कहा है:- “खेल सभी खिलाड़ी खेलते है, पर जीतता वही है जो जीतने या हारने के लिये नही केवल खेलने के लिये खेलते है ।“

खिलाड़ी की सोच के आधार पर खिलाड़ी तीन प्रकार के होते है :-

  1. जो जीतने के लिये खेलते है ।
  2. जो हराने के लिये खेलते है ।
  3. जो सिर्फ खेलने के लिये खेलते है ।

पैहले प्रकार के खिलाड़ी वो होते है, जो जीतने के लिये खेलते है । ऐसे खिलाड़ी केवल जीतने के लिये खेलते है । उनकों सिर्फ अपने आप से मतलब होता है, और अपने खेल से । उनको अपने नाम और रुतबे के लिये खेलते है । उनकों और खिलाड़ियों से ज्यादा मतलब नही होता । ऐसे खिलाड़ी अपने खेल को और खुद को दूसरों से ज्यादा समझते है । ऐसे खिलाड़ियों का खेल तो अच्छा होता है पर, एक अभिमान भी उनके मन मे आ जाता है। ये हारने पर ज्यादा परेशान हो जाते है। पर अगली बार फिर अच्छा करते है । ऐसे खिलाड़ियों के साथ ऐसा भी होता है कि अगर इनको कुछ हार एक के बाद एक मिलने लगे तो ये बहुत ज्यादा परेसान हो जाते है और परेसानि मे बार – बार गलती कर देते है । जिस कारन इनका खेल और खराब हो जाता है । ये मैदान के बाहर अभीयाश और मेहनत तो काफी करते है पर मैदान मे उतना अच्छा नही कर पते क्यू कि वो पिछली हार उनके मन मे बैठी रहती है । ऐसा सब के साथ नही होता पर अधिकतर के साथ होता है । ये तो थे वो खिलाड़ी जो जीतने के लिये खेलते है ।

दूसरे प्रकार के खिलडी वो होते है जो हराने के लिये खेलते है । ऐसे खिलड़ी अपने खेल को बेहतर बनाने से ज्यादा सामने वाले को कैसे हराये इसमें ज्यादा मेहनत करते  है । ऐसे खिलाड़ियों को अपनी जीत से ज्यादा दूसरे की हार से मतलब होता है । ये दूसरों को हराने के लिये कुछ भी कर सकते है । ऐसे खिलाडी ज्यादा समय तक खेल से नही जुड़े रह पते । खेल से दूर होने का कारन ये खुद होते है । ये थे वो खिलाड़ी जो दूसरों को हराने के लिये खेलते है ।

तीसरे प्रकार के खिलाड़ी वो है जो ना तो जीतने के लिये खेलते है और ना ही दूसरों को हराने के लिये । ये केवल खेलने के लिये खेलते है । उनकों हार या जीत से ज्यादा मतलब नी होता वो केवल खेल के लिये जीतें है । उसे उस खेल मे खिलाड़ी कि कमी पर और उसकी बेहतर खेल को बारिकि से देखते है । वो हराने पर हतास नही होते बल्कि वो हार के कारन को समझते है फिर उस कमी को दूर करते है । इनको खेल की बारीकियों के बारे मे औरो से ज्यादा पता होता है । ये थे तीसरे प्रकार के खिलाड़ी ।

ये थे खिलाड़ी जो खेलते तो एक ही खेल है पर इनकी सोच अलग होती है । चाहे पैसा और नाम   कोई भी कमाये पर अच्छा खिलाड़ी वही है जो जीतने के लिये नही खेलने के लिये खेलता है । उस खेल को दुनियाँ मे एक अलग ऊचाई पर लेजाने के लिये खेलते है । ये तीसरे प्रकार के खिलाड़ी होते है ।  तो हमे एक अच्छा खिलाड़ी बनना चाहियें । खेल के लिये एक सही खिलाड़ी ।

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