The Golden Girl – Hima Das

हम भारतीय हीरो की तलाश में रहते हैं, आख़िर हमें हीरो वर्शिप यानी नायक पूजा की आदत जो है. पिछले एक महीने से नकारात्मक ख़बरों से सुकून देने का काम किया फर्राटा क्वीन ढिंग एक्सप्रेस हिमा दास द्वारा एक के बाद एक जीते गए पांच गोल्ड मेडल्स ने. हिमा ने ये मेडल्स यूरोप की अलग-अलग प्रतियोगिताओं में हासिल किए. मुख्यधारा की मीडिया से पहले सोशल मीडिया हिमा की तारीफ़ में कसीदें पढ़ रहा था. बेशक़, जब भी बुनियादी सुविधाओं के घोर अभाव से जूझ रहे किसी देश का खिलाड़ी अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में शानदार प्रदर्शन करे तो उसकी तारीफ़ होनी ही चाहिए, पर हम हीरो की तलाश में इतने उतावले रहते हैं कि बस गोल्ड मेडल का नाम सुनते ही किसी भी खिलाड़ी को महानता के शिखर पर बैठाने के लिए बेसब्र से हो जाते हैं. इसमें कोई दो राय नहीं कि हिमा दास हाल के दिनों में भारतीय एथलेटिक्स के उभरते हुए चेहरों में प्रमुख नाम हैं, पर उनकी हालिया सफलता को जितना ग्लोरिफ़ाई किया जा रहा है, वह कितना सही है?

ऐथलेटिक्स हीरो, जिसकी देश को तलाश थी
‌राष्ट्रीय स्तर पर अच्छा प्रदर्शन कर रहीं हिमा से अप्रैल 2018 में आयोजित राष्ट्रमंडल खेलों यानी कॉमनवेल्थ गेम्स में अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद थी. उन्होंने निराश भी नहीं किया. वहां उन्होंने 400 मीटर की दौड़ 51.32 सेकेंड्स में पूरा करके छठां स्थान हासिल किया. हिमा पहली बार सुर्ख़ियों में तब छाईं, जब उन्होंने उन्होंने जुलाई 2018 में फ़िनलैंड में आयोजित वर्ल्ड अंडर-20 ऐथलेटिक्स चैम्पियनशिप में 400 मीटर की दौड़ 51.46 सेकेंड में पूरी करते हुए गोल्ड मेडल जीता था. हिमा ऐसा करनेवाली पहली भारतीय महिला एथलीट बनी थीं, स्वाभाविक है उनसे उम्मीदें बढ़ गई थीं. अगले ही महीने जकार्ता में आयोजित हुए एशियन गेम्स में महिलाओं की 400 मीटर की फर्राटा दौड़ 50.79 सेकेंड्स में पूरी करके हिमा ने सिल्वर मेडल हासिल किया. यह एक नया राष्ट्रीय रेकॉर्ड था. एशियन गेम्स में भारतीय टीम द्वारा रिले और मिक्स में क्रमश: गोल्ड और सिल्वर जीतने में हिमा का अहम योगदान था. यानी देश को वह ऐथलेटिक्स हीरो मिल गया था, जिसकी तलाश पीटी ऊषा के जाने के बाद से जारी थी.

हिमा का गोल्डन पंच, जो इन दिनों सुर्ख़ियों में है
2 जुलाई से 20 जुलाई के बीच हिमा ने यूरोप के पोलैंड और चेक रिपब्लिक के अलग-अलग शहरों में आयोजित ऐथलेटिक कॉम्पिटिशन्स में भाग लिया था. इस दौरान 200 मीटर में चार और 400 मीटर की दौड़ में एक यानी कुल पांच गोल्ड मेडल जीतकर हिमा अख़बारों की हेडलाइन्स से लेकर, सेलेब्स के ट्वीट्स, आम लोगों के सोशल मीडिया पोस्ट्स में छाई हुई हैं. एकबारगी 19 दिनों में पांच गोल्ड मेडल जीतने की बात बेहद बड़ी और महत्वपूर्ण उपलब्धि लगेगी, ख़ासकर अंतर्राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में मेडल जीतने के मामले में देश के फिसड्डी अतीत को देखते हुए. लेकिन इस बीच ज़्यादातर लोगों ने इस तथ्य की ओर ध्यान देने की ज़रूरत महसूस नहीं की कि आईएएएफ़ (इंटरनैशनल असोसिएशन ऑफ़ ऐथलेटिक्स फ़ेडरेशन) ने इन इवेंट्स को वर्ल्ड स्टैंडर्ड का दर्जा नहीं दिया था. हिमा ने अनुभवहीन और क्लब स्तर की प्रतियोगियों से कंपीट करते हुए ये गोल्ड मेडल्स हासिल किए हैं.
200 मीटर की जिन चार दौड़ों में उन्होंने गोल्ड मेडल हासिल किए हैं, उनके लिए उन्होंने 23.65 सेकेंड्स (पोज़नान), 23.97 सेकेंड्स (कुंटो), 23.42 सेकेंड्स (क्लैडनो) और 23.25 ‌सेकेंड्स (टैबोर) का समय लिया, जबकि 200 मीटर की दौड़ का भारतीय रेकॉर्ड 22.82 सेकेंड्स का है. एशियन रेकॉर्ड 22.01 सेकेंड्स और विश्व रेकॉर्ड 21.34 सेकेंड्स का है. इस पैमाने पर हिमा का बेस्ट प्रदर्शन (23.25 सेकेंड्स) कहीं नहीं टिक पाता. यही हाल 400 मीटर की दौड़ में मिले गोल्ड का रहा. हिमा ने इसे पूरा करने के लिए 52.09 सेकेंड्स लिए, जो कि उनके सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 50.79 सेकेंड्स की तुलना में काफ़ी लचर है.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *